बुधवार, 14 जनवरी 2015

पिताश्री तुम जीवित हो


15 January 2015
07:10
-इंदु बाला सिंह

तेरा आभार पिताश्री  !
जुझारू बनाने के लिये ........
सर उठा कर जीना सिखाने के लिये मुझे ......
तुम चले गये
पर
तुम्हारा स्वाभिमान जीवित है ........
तुम जीवित हो
तुम्हारा कौशल जीवित है
तुम्हारी बेटी में |

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