रविवार, 4 जनवरी 2015

अजूबी रीत


05 January 2015
07:19
-इंदु बाला सिंह


जग की
अजूबी रीत है देखी यारो !
जो चलती
बड़े शान से
साड़ियों में
चाहे दस हजार के मूल्य की हो
या
सौ रूपये के मूल्य की ........
कीर्तिगान गाती साडियां ........
अपने बेटा का
अपने बेटी के आदमी का
अपने व्रत का
अपने रस्मों का .................
काश !
उन साड़ियों में
एक जीवंत स्वाभिमान होता
कुछ अन्वेषण होता
कुछ खुशबु होती |

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