29
January 2015
22:51
-इंदु बाला
सिंह
कभी कभी हम
इतना विश्वास
और आशा रख
लेते हैं
किसी सुखद
परिवर्त्तन पर
कि
हमारी
वे अपूर्ण आशायें
हमें आक्रामक
व अस्थिर बना देती हैं
बेहतर है हम
भिड़ जायें समय से
पूरी ताकत से
........
हमारी
आकांक्षायें पूरी होंगीं
अवश्य पूरी
होंगीं हमारी चाहतें
क्योंकि
सपने सच हो
जाते हैं
गर हमारे मन
में दृढ निश्चय और स्थिरता हो |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें