29
January 2015
12:56
-इंदु बाला
सिंह
गुड़ाकू करते
हुये आती थी
वह कामवाली
और
गुड़ाकू करते हुये जाती भी थी .............
मुहल्ले में
उसका नाम ही पड़ गया था
'
गुड़ाकूवाली '
मुंह से लार
टपकाते हुये चलती थी वह
फिर भी उसे
काम मिल जाता था घरों में
एक दिन दिखी
वह
चेहरा सफ़ेद था
उसका
पर
मुंह
लाल न था गुड़ाकू से
सुना मैंने
उसका आदमी गुजर गया है .......
अब वह चुपचाप
गुजरती थी सड़क पर से इधर उधर देखते हुये
पुराने चेहरों
में अपनापन टटोलते हुये
उसकी
चाल की तेजी
गुम गयी थी |
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