27
January 2015
12:01
-इंदु बाला
सिंह
मन न मिलते
जब
तो
आवाज शीशा
उगलती हमारे कान में
बेहतर होता
तब
कि सास बहु
अलग रहें
बड़ा कठिन
होता
आंख के आगे
देखना
होते पराया
अपना बेटे को
और मुस्काना
अपने मित्रों
के सामने |
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