शनिवार, 24 जनवरी 2015

तुलसी बिन घर सूना


23 January 2015
13:59
-इंदु बाला सिंह

ओ तुलसी !
तू सबसे अच्छी
तेरे बिन घर सूना
तेरी पत्ती बिन चाय है फीकी
पंचामृत में भी तू पड़ती
यूं ही बढ़ना
जीना मेरे गमले में
और
महकना तू |

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