21
January 2015
07:38
-इंदु बाला
सिंह
आखिर क्यों
उठाते हो तुम अकेले
अपने सर पर
पूरा बोझ
ओ
पुरुष !
सम्हाल तो
पाते नहीं तुम
कभी तुम्हारा
बोझ गिर जाता है
तो
कभी तुम |
यह कौन सा दंभ
है
जो
तुम्हें सदा
अकड़े रहने को प्रेरित करता है
और
तुम्हारी
पितृसत्ता को सींचते सींचते तुम्हें मिट्टी में मिला देता है |
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