मंगलवार, 20 जनवरी 2015

पुरुष का दंभ


21 January 2015
07:38

-इंदु बाला सिंह

आखिर क्यों उठाते हो तुम अकेले
अपने सर पर पूरा बोझ
ओ पुरुष !
सम्हाल तो पाते नहीं तुम
कभी तुम्हारा बोझ गिर जाता है
तो
कभी तुम |
यह कौन सा दंभ है
जो
तुम्हें सदा अकड़े रहने को प्रेरित करता है
और
तुम्हारी पितृसत्ता को सींचते सींचते तुम्हें मिट्टी में मिला देता है |

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