शुक्रवार, 16 जनवरी 2015

जीना और मरना


16 January 2015
22:41
-इंदु बाला सिंह

मरना और जीना हमारी सोंच पर निर्भर है
कभी हम जीते हुये भी मरे से रहते हैं
तो
कभी हम मरे हुये से अपने सपनों में जीते रहते हैं |

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