04
January 2015
22:59
-इंदु बाला
सिंह
मेरी सास
अकेली है न
इसलिये
मेरी देवरानी
देवर व बच्चे एक साथ एक ही कमरे में सोते हैं
हमारा
पैतृक घर तो गांव में है ......................
अपनी सहकर्मी
के मुंह से सुन यह वाक्य
अचंभित व
तृप्त हो गया मन
शायद मिटा न
था संस्कार उस घर से
और
याद आयी मुझे
.......
अपनी माँ |
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