04
January 2015
07:52
-इंदु बाला
सिंह
शब्द हैं जब तक
मैं जिन्दा
हूं पन्नों में
मेरी सन्तान
जब तक जिन्दा है
मैं जीवित
हूं उनके मन के तरंगों में
कितना
भी मारो तुम मुझे
याद आउंगी
मैं तुम्हें
बरसाती रातों
में
माना जन्मी
हूं मौसम से
और
समा जाउंगी
मौसम में
पर
कहानियों में
रहूंगी जीवित मैं
क्योंकि
कर्म
जीवित रहते हैं ......
और
वही बोलते भी
हैं |
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