मंगलवार, 27 जनवरी 2015

बड़ी गरीबी झेला हूं


27 January 2015
16:42

-इंदु बाला सिंह


अरे यार !
थक गये कान
अब तो
सुन सुन के सबकी गरीबी .......
जिसे देखो वही आलाप रहा है
मैं बड़ी गरीबी झेला हूं
अपने बचपन में .......
अरे !
तुम गरीब थे
तो मेरा क्यों दिमाग चाट रहे हो ?
क्यों अपमानित कर रहे हो इस धरती के करोड़ों अभावग्रस्त व्यक्तियों को ?
अरे !
आदमी तो मन से गरीब होता है
धन से नहीं |

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