गुरुवार, 8 जनवरी 2015

अहा ! आई बिल्ली


08 January 2015
12:26
-इंदु बाला सिंह


अहा !
आई !!! ......हमारे घर हमारी बिल्ली
ले के
संग अपने दो बिलौटे .............
एक बिलौटा हुबहू अपनी माँ सा दुधिया रंग का
गोरा चिट्टा
दूजा ...... ! ......शायद अपने बाप सा
भूरा भूरा .....
दुधिया रंगवाला
चमकीली आंखोंवाला इधर उधर देख रहा था
मुझे देख छुप गया वापस
हमारे सीढ़ी - घर में ....
थोड़ी देर बाद दोनों निकले
एक के पीछे एक धूप सेंकने
देखा उन्होंने मुझे
निश्चल बैठे धूप में
पहले डर गये वे
फिर एक बिलौटा गाल टिका के बैठ गया सीढ़ी पे
उसे भी धूप चाहिये थी ......
और दूसरा भूरावाला खड़ा रहा
सहमा सा देखता रहा मुझे ......
ये  प्यार है या पहचान
न जाने क्या था
जिसे न खोना चाहती थी यह बिल्ली
साल भर घूमती थी हमारे बाग़ में
पर न घुसती थी
हमारे घर में ...............
मैंने न दिया तुझे कभी कुछ खाने को
फिर भी
ओ बिल्ली रानी !
तू आ जाती है मेरे घर
तू याद रखती है क्या मुझे !
क्या सोंचती तू ?
ओ री बिल्ली ! जरा बतला न |


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