शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

अपनी झांसी नहीं दूंगी

औरत हूँ भई !      
देवी नहीं
नारी हूं मैं  
नारायणी नहीं
सुसुप्त ज्वालामुखी हूं
आकाश सी सहिष्णु नहीं
जागने का मन होगा तो
जग जाउंगी
मैं थी .....
और रहूंगी मैं .....
सदा ही रहूंगी मैं .......
बसी रहूंगी हर कन्या में
कितने भ्रूण मारोगे तुम मेरा
बारम्बार जन्मुन्गी मैं
तेरा संहार करने
अपनी झांसी नहीं दूंगी मैं
जीते जी
मेरी झांसी मेरी शान है
मेरी आन है |

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