अरे !
कोई तो हाथ बढ़ाएगा पहले
मित्रता के लिए
चाहे मैं
या पहले तू
यह मेरा गर्व बोले
तू ही तो आया था
मेरे द्वारे
बन याचक साथ का
गुरु भी उतना ही अकेला
जितना है शिष्य
शिष्य न रहे तो पुस्तकें
जल जायेंगी
समय की आग में |
कोई तो हाथ बढ़ाएगा पहले
मित्रता के लिए
चाहे मैं
या पहले तू
यह मेरा गर्व बोले
तू ही तो आया था
मेरे द्वारे
बन याचक साथ का
गुरु भी उतना ही अकेला
जितना है शिष्य
शिष्य न रहे तो पुस्तकें
जल जायेंगी
समय की आग में |
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