शनिवार, 11 जनवरी 2014

गर्व भरा है अस्तित्व

अरे !
कोई तो हाथ बढ़ाएगा पहले 
मित्रता के लिए 
चाहे मैं 
या पहले तू 
यह मेरा गर्व बोले 
तू ही तो आया था 
मेरे द्वारे 
बन याचक साथ का
गुरु भी उतना ही अकेला
जितना है शिष्य
शिष्य न रहे तो पुस्तकें
जल जायेंगी
समय की आग में |

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