सोंचा था
युद्ध
खत्म हो
जाएगा एक दिन
सकून
मिलेगा एक
दिन
पर
अब लगे
युद्ध ही
जीवन है
विश्राम हार
है
यह चेतना आते
ही
फिर से चमका
ली है
मैंने
अपनी तलवार
और
अब तो
घोड़े पर ही
सोती हूं
जागती हूं |
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