टी० वी ० पे देख महिमा झाड़ू की
मेरे बिटवा का मन हरसाया
झाड़ू कंधे पर रख करे वो करे कदम ताल
और फिर करे
दांये बांये थम्म
मैं खोजूं झाड़ू इधर उधर
कभी मिले बिटवा के पलंग के नीचे
तो कभी उसकी अलमारी के पीछे
देख उसका झाड़ू प्रेम
एक दिन कहा मैंने ....
दुकान से झाड़ू खरीद कर ला
बड़ा छोटा हो गया है झाड़ू ......
कभी झाड़ू हाथ में ले कर सड़क पर चलने वाला
झट हो गया तैयार
आधा घंटे में लौटा वह
झाड़ू ले कर
सफाई देते हुए मेरा बिटवा बोल उठा ......
राह में मिल गया था न एक मित्र
वह पूछने लगा था ट्यूशन के बारे मे
इसीलिये देरी हो गयी माँ ....
इसीलिये देरी हो गयी माँ ....
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