शनिवार, 4 अप्रैल 2015

पौधा और इंसान


04 April 2015
20:23


-इंदु बाला सिंह



किसान का दर्द
न महसूसा जिस इंसान ने  
वह
अपने जन्मदाता का दर्द क्या समझेगा
सब्जी बेचती
दूर गांव से आयी औरतों के
अंधियारों को जिसने न महसूसा
वह
अपने घर के उजियारे का क्या मोल आंकेगा ..........
रोते हुये आया था
वह
फटी आँखों से
अपनी आशाओं के मरे पौधे देखता हुआ 
जरूर सो जायेगा
एक दिन |

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