बुधवार, 1 अप्रैल 2015

युद्धरत है सेनानी


Indu Bala Singh
April 1, 2013 at 11:09pm ·

कितना अहम है
ऐ पुरुष तुझमें
महिला के विचार सदा नगण्य होते हैं
सदा अनुगामी के रूप में ही रखने की
तेरी आकांक्षा
चाहे कुछ भी हो उसका तुझसे रिश्ता
भाता है सदा तुझे
अरे जाओ जब माँ का मन न पढ़ सके
तो क्या पढ़े तुम
सदा अकेले रहोगे तुम
अपने ही घर में अपनत्व से दूर
रावन का बल टूटा
तो क्या तूम उससे शक्तिशाली हो
टूट जाओगे
अब भी समय है सम्हलो
क्यों कि
हर घर में
हक के लिए युद्धरत है सेनानी |

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