सोमवार, 6 अप्रैल 2015

स्त्री नदी है |


07 April 2015
06:48
-इंदु बाला सिंह
सुलझी स्त्री नदी है
घर के प्राणी को तृप्त कर बहती जाती है
नाचती है
गुनगुनाती है
धनार्जन करती है
पर दुखी होने पर वह सूख भी जाती है
और घर का पुरुष
' लक्खी-छड़ा ' नाम से प्रसिद्धि पा
सडकों पर
भटकता रह जाता है |

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