15 April
2015
06:40
-इंदु बाला
सिंह
पैतृक घर हो
या
स्वसुर गृह
हो
छांव
व प्यार मोह में डूबी
आधी आबादी
को
क़ानून से
क्या मतलब
वह तो
बस एक छत के
नीचे रह
कछान मार
शब्दभेदी बाण
चला चला
निपटा लेती
आपस में ही
घर के मर्दों की हर समस्या
और
वह
पैतृक
सम्पत्तिहीन
आजीवन
सैनिक ही बनी
रह
अपनी
सरीखी माँ जन्मा जाती है |
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