शनिवार, 4 अप्रैल 2015

शहर में जंगल


05 April 2015
10:22


-इंदु बाला सिंह

आखिर मिटा ही दी हमने
इंसानियत को जानवरों से अलग करने वाली रेखा
और भूल गये हम
अपनों को पहचानना
अब
शक्तिशाली ही शासक है
देखते देखते
शहरों में
असंख्य जंगल बन गये |

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