13 April
2015
17:36
-इंदु बाला
सिंह
मौसम आये और
गये
बेटियां
खिलखिलाने की आस लिये मुरझायीं
पर
वे
जमीन से जुड़ी रहीं
धरती की कोख
में समाती रहीं
कब आजाद होंगी
...........
मान पायेंगी
.........
आम घरों में
बेटियां
दुखी है
आज
जी |
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