25 March
2015
11:36
-इंदु बाला
सिंह
यह
मेरी मजबूरी
थी
कि
तेरी मजबूरी !
न
जाने क्या था ......
पर
सदा ही पाया
मैंने
तुझे
खड़े अपने बगल में
मेरे सुख
दुःख के पल में
और
एक
दिन मन बोला ........
ओ
मेरी बिटिया रानी !
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