शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

प्यारी बिटिया


25 March 2015
11:36


-इंदु बाला सिंह


यह

मेरी मजबूरी थी

कि

तेरी  मजबूरी !

न जाने क्या था ......

पर

सदा ही पाया मैंने

तुझे

खड़े  अपने बगल में

मेरे सुख दुःख के पल में

और

एक दिन मन बोला ........

ओ मेरी बिटिया रानी !

जा तू मातृ ऋण से मुक्त हुयी |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें