शुक्रवार, 2 मई 2014

पत्रिका का अस्तित्व


02 May 2014
06:24
    -इंदु बाला सिंह

कम्प्यूटर के बिगड़ते ही
बड़े दिन बाद
पत्रिकाओं के भाग जगे
चार किलो पुरानी पत्रिकाएं
आयीं घर में
रद्दी की दुकान की
आज तो बड़ी हुयी कमाई
सज गया टेबल
रंग बिरंगी पत्रिकाओं के ढेर से
क्यूँ कि
नई पत्रिकाओं पर पैसे खर्च करना न भाया था उसे
कुछ दिन पत्रिकाएं ही मित्र
सोंच पलटते पलटते
दिखे सुंदर रेडी मेड ड्रेस
फिर
दिखे सचित्र छपे मीठे पकवानों को पकाने की प्रणाली
और
उसका मन
मीठा खुशबूदार हो गया |

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