02 May
2014
06:50
-इंदु बाला सिंह
मन्दिर न
होता
तो कहां हम
जाते भोर भोर
किस
बहाने दिखाते हम अपनी व्यस्तता
कैसे होती
हमारी सैर
वैसे
मन्दिर तो
हमारे घर में ही है
पर
लोटे में जल
और पोलीथीन में बेलपत्र फूल ले
जब चलते हैं
हम सड़क पर
तभी तो
मुहर लगती है
हम पर धार्मिक होने की |
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