मंगलवार, 20 मई 2014

जब आंख खुली


16 May 2014
15:56

-इंदु बाला सिंह

बूढ़ा जौहरी
मुस्कुरा रहा था
उल्लसित वातावरण में
मन्त्र मुग्ध भीड़ के जयघोष से ........
आज
वह
पुलकित था ..............
पर
कब उसकी आंख लग गयी
उसे
पता ही न चला .................
सुबह हुयी
जब आँख खुली
तो
उसने सब कुछ
हर रोज की तरह पाया
सब अपने काम पर जा रहे थे |

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