06 May
2014
12:47
-इंदु बाला सिंह
पूरा घर
विरुद्ध हो
और
सधवा घरेलू
बहुओं वाला
परिवार हो
तो
उस अकेली
चचेरी सास
के मन की
कल्पना करना
भी
दुष्कर
हो जाता है
वह बुजुर्ग
औरत
जिसके आंगन
तो जुड़े हैं
पर
चूल्हा अलग
है
जिससे
भरापूरा
परिवार
मनचाहा
बना खा सके ........
अकेली चचेरी
सास
चूल्हा फूंके
अपनी बला से
बर्तन मांजे
हल्दी पीसे
साथ में अपना
भाग भी पीसे
पर
नसीब
की गाँठ खुले तब न ......
हिस्सेदारिन
बहुएं
अपने तरफ के
आंगन का कचरा
चचेरी सास के
हिस्से में
उड़ा मस्ती लें
........
ठिठोली करें
......
बड़ी बेटीवाली
है
जा कर रहती
नहीं बेटी के पास
अफसर बेटी है
इसकी .....
हम भी
जरा मजा लें
उस अफसर बेटी का
आ कर रहती
नहीं यहां
अपने घर में
.........
फिर
एक जोर की
दुसरे हिस्से
सी आती
राक्षसी हंसी
डरावनी लगने
लगती थी उसे
कभी कभी उसे
लगता था
कि
उसका नसीब भी
थेथर हो गया है
आयु के साथ
साथ
देखता रहता है
अपने
सम्बन्धियों को
पति गर्व में
फूली
तीज त्यौहार
में सजी धजी
चहकती
औरतों को |
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