शुक्रवार, 23 मई 2014

शब्द शाश्वत हैं


21 May 2014
14:54

-इंदु बाला सिंह

आदमी नश्वर है
पर
शब्द नहीं
जब तक
श्रोता और वाचक जीवित है
तब तक
शब्द शाश्वत हैं
वे
हवा में तैरते हैं
अपनी खुशबू बिखेरते हैं
कांटे चुभोते हैं ……..
शब्द
मन में सांसें लेते हैं |

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