बुधवार, 26 जून 2013

हिम्मत न हार

1978

हर पल कुछ छूट रहा
मुट्ठी से बालू सा कुछ फिसल रहा
क्या मिटना ही तेरी नियति है ?
ओ !
शक्तिपुंज स्नेहवत्सला हो कर भी
दीन हीन ही कहलाना तेरी उपलब्द्धि है ?
घबरा न
जलती बुझती बिजली के लट्टुओं सी तू
आश्रितों को रोशनी दिखाती जा रही तेरी काया लायेगी परिवर्तन
देखना एक दिन
हिम्मत न हारना कभी तू |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें