सोमवार, 10 जून 2013

विद्यालय एक कहानी है |

बारह तेरह वर्ष के बालक को
टांगी से पेड़ काटते देख
या बेलचा से इंटा जुड़ाई का मसाला तैयार करते देख
मन में अब अलग भाव उपजते हैं
यह यह भी तो  किसी माँ का गौरव होगा
घर में इसकी माँ राह तकती होगी
शाम को  लौटेगा बेटा शहर से
लायेगा उसके सपने
चावल तभी न जलेगा चूल्हा
पढ़ाई लिखाई तो भरे पेट की कहानियाँ हैं |

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