मंगलवार, 10 सितंबर 2013

समझौते

09.07.2000

अंतर्मन के लम्बे शीत युद्ध की परिणति
पागलपन हो या नपुंसकता
दोनों ही डुबोती है स्व को
और रचना करती है एक अनोखे समाज की
नवोदित क्षत्रिय प्रसन्न होते हैं रक्त बहा
गौरव पाते हैं
अभिमन्यु बन जाते हैं
पर रात्रि के सन्नाटे में अर्जुन का मौन रुदन
हमें नहीं भूलना चाहिए |

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