20.12.01
अपशब्द नहीं
फूटते मुंह से
पर मौन रुदन
मेरा
जरूर फलीभूत
होगा
कर्मफल तो भोगना पड़ता है न हर व्यक्ति को
करना पड़ेगा
प्रायश्चित तुम्हें .....
कर्म से , मन
से , वचन से ....
सलीब पर लटका
मन समझाये नहीं मानता
समय का मरहम
भी नहीं भरता तुम्हारा दिया घाव |
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