शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

सशक्तिकरण

06.01.91


हर अवरोध बनाता है उसे फौलाद
हर दिन मन पकता है
परिस्थितियों में
वह हैरान है
अपने इस बदलाव पे
सोंचती है वह
आज जैसा मन उसका कल तो न था |

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