1984
चाचा नेहरु !
तुम कहाँ हो ?
मेरी व्याकुल
ऑंखें
खोज रही हैं
तुम्हें
आज के दिन
तुम मुझे बेहद
याद आ रहे हो
माँ सुनाती है
तुम्हारे
सच्चे किस्से
मैं उत्सुक
जिज्ञासु सुनता हूँ
सदा तुम्हारे
किस्से
कैसे फूल से
खिल उठते थे तुम
बच्चों को देख
अपनी व्यस्ततम
यात्रा में भी रुक जाते थे पल भर को
किसी बालक को
देख मार्ग में
काश मैं
तुम्हें देख पाता सशरीर अपने सामने खड़े
दूरदर्शन पर
जब कभी तुम आते हो
मन रोमांचित
हो जाता है
मैं खुश हूँ
कि आज
तुम्हारा जन्मदिन है
और सारी
दुनियां तुम्हें याद करेगी
ढेर सारी
बातें करेगी भारत माता की |
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