शनिवार, 7 सितंबर 2013

गांठ बांध कर आयी

09 .07.12  

गांठ बांध कर आती है
जिस आदमी से औरत
उसके साये तले
उसके घर में
रहती है आजीवन |
उस आदमी के न रहने पर
औरत ढूंढती है
दूसरा सहारा पुत्र या किसी दुसरे रिश्ते में
कितनी बेबस है वह
क्यों रखते हैं हम
उसे साये के अभ्यस्त
क्या उसकी अपनी क्रांति ही
निकाल कर लायेगी साये से बाहर उसे
और खड़ा करेगी पुरुष के बगल ?
समाज क्या उसे यह कदम उठाने देगा ?
कितनी जटिल समस्या है यह !

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