बुधवार, 11 सितंबर 2013

होनी

12.10.06


बदली है चाल मैंने
जब जब जीने के लिए
तब तब पाया है सामने तुम्हें
यों लगता है
मेरी हर चाल का है तुम्हें पूर्वानुमान
मेरे मोहरा चलने से पहले
दिया है तुमने संकेत नई चाल का
अचंभित होती हूँ मैं
इस होनी से |

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