मेरी माँ
बुरबक है ....
अरे !
मेरी
माँ तो घोंचू है ....
तिलमिला गया मन
इन संबोधनों से माँ के प्रति
आखिर क्यों लगती है माँ
श्रीहीन
औलादों को ?
अपनी संतान के
अपने प्रति
इस नजरिए को
आप नजरअंदाज
न करें
यह हल्की बात नहीं है
बीज है
जो कुछ काल पश्चात्
एक बड़ा वृक्ष बनेगा
आप
उस वृक्ष का फल
खाने को मजबूर होंगी |
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