बुधवार, 10 अक्टूबर 2012

छोटी कवितायें - 17



  ये शहर 


शहर में
झूठ के सहारे
पैसे की गर्मी में
कितने करते अपराध
दुर्बल घोषित
सबल
...................
क्या यही शहर है ?
अपनी चकाचौंध से लुभाता
भौतिक सुख सुविधा जुटाता है
हमें ये शहर
किसने मारी इसकी आत्मा
पूछो न जरा 
सरकार से जाकर |


  शरीर की देख भाल 


विज्ञान में
पढ़ लेंगे बच्चे
अपने शरीर की देख भाल
हम निश्चिन्त रहें |
हम ये देखें
शिक्षक क्या व कैसे
पढ़ा रहा है |
शिक्षक लेता है पैसे
पढ़ाने के लिये ही
चौकस रहिये !

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