घर में माँ
को पूछते नहीं
मंदिर में
पूजते हैं
सच में सजीव
है माँ मंदिर में
तो कभी न
करेगी
पूरी
अभिलाषा तेरी रे !
ओ रे !
सुन मानव !
प्रथम पूजा घर से होती शुरू
घर की पूजा
कोई न देखे ये न सोंच
देखनेवाला
देख ही लेता है
माँ की चाहत भूल
चला तू मंदिर में
कर्मकांड करने
ये
कैसी नासमझी ?
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