मंगलवार, 16 अक्टूबर 2012

पिता का घर


उपहार के अभाव में
छूट जाता है बेटी से
पिता का घर !
अरे !
वह आपका अपना घर है
संकोच कैसा
ठाट से जाईये
जब तक माँ-बाप जीवित हैं
उनके दुःख बांटिये
बीसों बार जाईये
नहीं बुलाने पर भी जाईये
जबरदस्ती जाईये
खून के रिश्ते
न छोड़िये
टूटे तो न बने
अपनों से कैसा मान !
नवमी का त्यौहार है
बेटी की शक्ति का त्यौहार है
उपहार लीजिए
दीजिए उपहार
देखिये !
बेटी की कमाई से
मिले उपहार से
कैसे दमकता है
जन्मदाता का चेहरा |

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