उपहार के अभाव में
छूट जाता है बेटी से
पिता का घर !
अरे !
वह आपका अपना घर है
संकोच कैसा
ठाट से जाईये
जब तक माँ-बाप जीवित हैं
उनके दुःख
बांटिये
बीसों बार जाईये
नहीं बुलाने
पर भी जाईये
जबरदस्ती
जाईये
खून के
रिश्ते
न छोड़िये
टूटे तो न
बने
अपनों
से कैसा मान !
नवमी का त्यौहार है
बेटी की शक्ति का त्यौहार है
उपहार न लीजिए
दीजिए उपहार
देखिये
!
बेटी की कमाई से
मिले उपहार से
कैसे दमकता
है
जन्मदाता
का
चेहरा |
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