सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

छोटी कवितायेँ - 11



    रूप


रूप निखारेंगे
कितना भी
आप
श्रम की चमक
न आयेगी नजर
मुस्करा कर देखेंगे
आइने में आप
जब भी
आखों का फीकापन
आयेगा नजर |

  प्रेम 

प्रेम कीजिये
आज
कर्म से आप
मुस्कराईये
तो जरा
देखिये
कितने ख़ूबसूरत हैं
आप |

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