रविवार, 28 अक्टूबर 2012

हम बेटी हैं



यह धरती उतनी ही हमारी  है
जितनी तेरी है |
जेवर पहना कर हमें तुम
लूटने का आतंक दिखा सकते नहीं |
हम भोग्या नहीं शक्ति हैं
हमें कोई बंधक बना सकता नहीं |
माँ हैं हम जला देंगे तुझे
आँखों की चिंगारी से |
छूना न औलाद हमारी
निशानी तुम्हारी मिटा देंगे |
जल की ज्वाला हम
समझ न हमें मस्ती की फुहार |
कमजोरी न समझ हमारा मातृत्व
शेरनी हैं हम फाड़ेंगे हर निकटस्थ दुश्मन को |
तू क्या दिखायेगा आँख हमें
हम तेरा पिंडदान कर देंगे |
सोयी ज्वालामुखी हैं हम
सोने दो आज हमें |
ललकार तू अब
जगाहमारे आत्मसम्मान को |
हम जागे तो
विध्वंस दर्शक न रह पायेगा |

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