यह धरती उतनी
ही हमारी है
जितनी
तेरी है |
जेवर
पहना कर हमें तुम
लूटने
का आतंक दिखा सकते नहीं |
हम भोग्या नहीं शक्ति हैं
हमें कोई बंधक बना सकता नहीं |
माँ हैं हम जला देंगे तुझे
आँखों की चिंगारी से |
छूना न औलाद
हमारी
निशानी तुम्हारी मिटा देंगे |
जल की ज्वाला
हम
समझ
न हमें मस्ती की फुहार |
कमजोरी न समझ
हमारा मातृत्व
शेरनी
हैं हम फाड़ेंगे हर निकटस्थ दुश्मन को |
तू क्या
दिखायेगा आँख हमें
हम
तेरा पिंडदान कर देंगे |
सोयी ज्वालामुखी
हैं हम
सोने दो आज हमें |
ललकार न तू अब
जगा न हमारे आत्मसम्मान को |
हम जागे तो
विध्वंस
दर्शक न रह पायेगा |
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