गुरुवार, 4 अक्टूबर 2012

छोटी कवितायें - 15

         मौत



        1



मौत की खबर
किसी परिचित की
आ जाये
तो रुक जाता है समय
एक पल
और दूसरे पल
मुख से निकलता
चलो खत्म हुआ
एक उपन्यास |

     2

मौत कितनी है प्रिय
पूछिये !
किसी अभावग्रस्त से
बीमार से
हताश से
अपनों से प्रताड़ित से
सुनिए !
कैसे वो हर पल पुकारता
दैव को
मृत्यु देवता को
ठंडी नींद को |

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