मौत
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मौत की खबर
किसी परिचित
की
आ जाये
तो रुक जाता
है समय
एक पल
और दूसरे पल
मुख से
निकलता
चलो खत्म हुआ
एक
उपन्यास |
2
मौत कितनी है प्रिय
पूछिये !
किसी अभावग्रस्त
से
बीमार से
हताश से
अपनों से प्रताड़ित से
सुनिए
!
कैसे वो हर पल पुकारता
दैव को
मृत्यु देवता
को
ठंडी नींद को |
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