मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

लायक लड़की

वह लायक बिटिया थी .....
पिता ने ब्याह कर दिया 
चली गयी 
ससुराल ........
पति कमा न पाया 
छोड़ गया 
लायक लड़की को 
अपने ससुर के पास ...........
ससुर ने दामाद को
लौटा दिया
दामाद को
और उसकी पत्नी को भला क्यों पालते ........
बिलकुल नहीं .......
लायक बिटिया
रह गयी पिता के घर ......
घर की सहारा थी
वह लड़की .......
घर की चौकीदार थी
वह लड़की ........
एक दिन
पिता भी चले गये
भगवान के घर
और
लायक लड़की
अपनी माँ के साथ रह गयी अकेली .................
अब पुत्र प्रेम में
विह्वल माँ की सहारा थी
लायक बिटिया ......
एक दिन
लायक बिटिया हकबका गयी
कहीं उसका नाम न था
पिता के तेरही के कार्ड पर ........
कुछ दिन बाद
उसने पाया
उसका नाम नदारद था
घर के सदस्य के विवाह कार्ड पर .............
फिर कुछ दिन बाद
वो और अचंभित हो गयी ...........
अरे !
उसका नाम तो
घर की डायरी में लिखे
पतों के लिस्ट में भी न था ..............
वह गुमनाम
और
परेशान हो गयी थी ......
अब
कोई अतिथि
घर में आने पर न पुकारता था उसे ...........
पिता की मृत्यु के बाद से
वह
लायक लड़की
सशरीर तो थी सबके सामने
पर दिखती न थी
किसी को ............

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