सोमवार, 24 फ़रवरी 2014

उन्मुक्त मन

बड़ा भला लगे
कभी कभी गुमनाम रहना
उड़ते रहना
नील गगन में उन्मुक्त
और
देखते रहना ........
अद्भुत नजारे
शान शौकत के लिए
कट मरती दुनिया ........
उदास
अकेला बैठा
अपनों के लिए तरसता मानव .......
खुले मैदान में
खेलते बच्चे ......
धर्म के नाम पर
बहते पैसे ...........
पर
सबसे भला लगे
लौट कर
वापस
अपने कमरे के अंधियारे में
आ जाना ......
वहीं मेज पर
जहाँ
खुशियों के उजाले का बटन
अपने हाथ में
सदा ही रहा |

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