चीखें !!!!
चारों ओर
चीखें !!!!!!!
धर्म के नाम
पे
स्वदेश के नाम
पे
अरे !
सत्य के नाम
पे
सहिष्णुता के
नाम पे चीखो तो जानूं
इतिहास गवाह
है
कितनी नदी बही
है
खून की
धर्म के नाम
पे
कितनी
सभ्यताएं मिटी हैं गरूर के नाम पे
जितनी जोर से
चीखेगा दबंग
और सुनाएगा
अपनी बात
डर से सहम
जाएगा सच
ये लो !
ठिठुर रहा है
सच
जुड़ी ताप चढ़ा
है उसे
कम्बल ओढ़ बैठा
है
क्या कंकाल बन
जायेगा सच !
भूख भी कितने
रूप बदले
स्थान काल
पात्र के अनुसार |
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