आज
उसे
अपना बचपन याद आया
कितना अबोध
था
उसका बचपन
जब
उसे लगता था
कि
वह बड़ी हो कर
एक
दिन पापा बन जायेगी ........
उसकी भी
बड़ी बड़ी
मूछें होंगी पापा सी
और
पापा
सा बड़ा पेट होगा ..............
एक दिन
वह
भी दबंग बन जायेगी
पापा सी
.............................
पर
आज
जब वह देखती
है
बच्चों की
स्वयं की
जागरूकता को
तो
बड़े फेर में
पड़ जाती है
वह
...............
आज
बच्चे अबोध
नहीं
वे
स्त्री पुरुष
के सम्बन्धों के
इतना ज्ञानी
हैं
कि
काल्पनिक
सपने तो
उन्हें
दिखते
ही नहीं ........
ऐसे सपने
उनके लिए
हास्यास्पद
हैं
जहाँ
परियों का
देश होता है
और
चाकलेट
का पेड़ होता है ........
गुड़ का पहाड़
और
शरबत
का तालाब भी होता है .........
स्कूल
कालेज से
निकल
बच्चे
नौकरी पकड़ते
ही
थक
जाते हैं ..........
आखिर
कौन सी
घुट्टी पिला कर
उन्हें
पालते हैं हम
|
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