रविवार, 2 फ़रवरी 2014

लौटना नहीं अब तो




गया काल
राजाओं का
अब न कोई अभिशप्त
लौटने को
राह आगे जाती है
परम्पराएं
परिमार्जित होती हैं
नींव नहीं हूं
घर की मैं.......
मैं तो
घर के प्रवेश द्वार का
दरवाजा हू
तोडना न मुझे
वर्ना
घर में घुस आयेगी काली आंधी |

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