गांठ बांध
एक अजनबी के
गमछे से
विदा कर दिया
अपनों ने
बिन बाप की
गोरी चिट्टी बिटिया को
एक राज्य से
दुसरे राज्य
और
फिर विदेश जा
पहुंची
बिटिया
अपना भविष्य
बनाने
एक पुरुष का
घर बसाने
जो कि उसका
भी
घर होयेगा
सजल नेत्रों
से
ताकूं
उस बिटिया के
स्मरण में बसे
चित्र को
इस आशा में
कि
कल सुनूंगी
उसके सुख की गाथाएं |
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