दिन रात
कृष्ण के बाल
रूप का पूजन
मोह भंग कर
देता है
तुम्हारे
प्रति
और फिर
इतने प्यारे
बाल मनोहर से भी
भंग होने
लगता है मोह
क्यों कि तूम
मेरे मानवीय वजूद को
इंकार कर
देते हो
तुम उस बाल
रूप गान कर
पुरुष सत्ता
को ही
शक्तिवान
करते जाते हो
तेरी अति
प्रीत
मुझे
न लागे भली |
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